स्वर और रस का संबंध
प्राचीन ग्रंथों में सात शुद्ध स्वरों के रसों का उल्लेख मिलता है व जो इस प्रकार है ......... सा ......स्थिरता और शांति रे ......चंचलता और उत्सुकता ग .....करुणा ,माधुर्य और कोमलता म .....गंभीरता ,शांति और भक्ति प ......संतुलन और वीरता ध....उत्साह ,उमंग और शांति नि .....विरह ,करुणा और आध्यात्मिकता लेकिन कोमल और तीव्र मध्यम के रस केवल अनुभव और अनुमान पर आधारित मानें जाते हैं ..... कोमल रे ......करुणा ,विनम्रता और शोक कोमल ग ....विरह ,करुण और गंभीर कोमल ध .....विरक्ति ,व्यथा और मार्मिकता कोमल नि ...शांति ,गूढता और आध्यात्मिकता तीव्र म ....अद्भुत ,रहस्यमय । जानकारी स्त्रोत ...... पुस्तक .....संगीत विशारद